ज्ञानवापी मामले पर मुस्लिम पक्ष का बयान, हमारे साथ हो रहा दुश्मनों की तरह व्यवहार
Gyanvapi Case: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि यदि हमारी अदालतें इस प्रकार का भेदभाव करेंगी, तो हम उन पर भरोसा नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले में हमें अपील करने का मौका मिलना चाहिए था, लेकिन रातों-रात पूजा शुरू कर दी गई है, जो गलत है। हम चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को पत्र लिखेंगे। हमने राष्ट्रपति से मिलने के लिए समय मांगा है, और जरूरत पड़ी तो हम दूसरे व्यक्तियों से भी मिलेंगे।
#GyanvapiMuslimsBandh: ज्ञानवापी में पूजा पर भड़के मुस्लिम धर्मगुरु, क्या कह दिया?
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Gyanvapi Case: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने क्या कहा ?
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा है कि अदालतों के ऐसे फैसले नहीं होते हैं, जैसे कि वर्तमान में हो रहे हैं। उन्होंने हमें कोई मौका ही नहीं दिया। वायस ऑफ खुरासान के जरिए बाबरी मस्जिद को लेकर धमकी देने पर इलियास ने कहा कि आईएसआईएस ने कहा है कि यह इश्यू उनका नहीं है। उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। कानूनी लड़ाई हो या फिर इंसाफ की, हम उस पर बात करेंगे। बाहर के लोग कुछ भी कहते हों, हम उस पर विचार नहीं कर सकते हैं।
ज्ञानवापी मस्जिद में अदा कि गई जुमे कि नमाज़, इस दौरान सुरक्षा के कड़े थे इंतेज़ाम… pic.twitter.com/rTnTTrntuE
— Ishraque Azmi 09 (@Mdazmi248792) February 2, 2024
मदनी ने कहा कि हम मुंह दिखाने के काबिल नहीं हैं.
ज्ञानवापी मामले पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष महमूद मदनी ने कहा है कि इससे इंडिया के न्यायिक सिस्टम पर एक बड़ा सवाल उठ गया है। एक-तरफा तौर पर जाते-जाते इनाम मिल जाएगा, जैसा कि इस तरह का फैसला हो रहा है। ऊपरी अदालत दखल देने के लिए तैयार नहीं है। मदनी ने कहा है कि पहले प्रेस कांफ्रेंस प्रेस क्लब में होने वाली थी, लेकिन प्रेस क्लब ने बातचीत को रोका है। प्रेस क्लब के लोग कहते हैं कि इस विषय पर आप बात नहीं कर सकते हैं। प्रेस क्लब के पास भी हम जा नहीं सकते हैं।
बात इस कदर नहीं होनी चाहिए कि खराबी की दिशा में बढ़ जाए। मदनी ने कहा है कि यह सही नहीं होगा कि दुश्मनों की तरह व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि हम मुंह दिखाने के काबिल नहीं हैं, और इसमें कुछ प्रेस का भी हाथ है। यह जंगलराज है और ऐसा नहीं होना चाहिए। नियाज फारुखी ने कहा है कि इस केस में बनारस कोर्ट ने एक फैसला किया, लेकिन हम उसके खिलाफ आला अदालत में गए, तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट जाएं। हाईकोर्ट ने भी नहीं सुना, और न ही लोवर कोर्ट ने। यह कौन सा इंसाफ है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट से मस्जिद पक्ष नहीं मिली राहत
गौरतलब है कि वाराणसी के ज्ञानवापी तलगृह में पूजा-अर्चना की अनुमति देने संबंधी जिला न्यायाधीश ने वाराणसी के आदेश के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट से मस्जिद पक्ष को कोई त्वरित राहत नहीं प्राप्त की है। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने 31 जनवरी को स्थिति बहाल करने की मांग की है। अगली सुनवाई अब छह फरवरी को होगी।
न्यायाधीश रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने कहा है कि मस्जिद पक्ष को पहले 17 जनवरी 2024 के आदेश के खिलाफ चुनौती देनी चाहिए। इस आदेश के बाद, वाराणसी जिलाधिकारी को नियुक्त किया गया है, जिन्होंने 23 जनवरी को ज्ञानवापी परिसर को अपने कब्जे में ले लिया है। इसके बाद, जिला कोर्ट ने 31 जनवरी के अंतरिम आदेश से काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट को पुजारी के रूप में तलगृह में पूजा करने की अनुमति दी है।





